ख ख सू: बोरेबासी खाकर मनाया गया मजदूर दिवस,, ससंदीय सचिव राजवाड़े ने मजदूरों का किया सम्मान…

सूरजपुर – सूरजपुर में आज 1 मई को श्रमिक दिवस मनाया गया,, जहा गढ़कलेवा में श्रमिक दिवस कार्यक्रम का अयोजन किया गया,, वही ससंदीय सचिव पारसनाथ राजवाड़े के मुख्य आतिथ्य में श्रमिको का सम्मान किया गया,, और बोरेबासी खाकर मजदूर दिवस मनाया गया,, वही प्रशासन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में श्रमिको के मेघावी बच्चो को शिक्षा के लिए राशि भी प्रदान किया गया,, कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, जिला आधिकारी समेत जिले के श्रमिक शामिल हुए । कार्यक्रम में शामिल रहे जिला पंचायत सीईओ लीना कोसम, नगर पालिका अध्यक्ष केके अग्रवाल, जनपद अध्यक्ष जगलाल सिंह देहाती, आदि लोग मौजूद रहे।

कैसे बनता है बोरे बासीदरअसल 1 मई को राज्य में बोरे बासी दिवस मनाया जाएगा. इसके लिए राजधानी रायपुर में बड़ी तैयारी की जा रही है. लेकिन हैं एक ही. पके हुए चावल को पानी में डूबोकर यह व्यंजन तैयार किया जाता है और दही, अथान पापड़, चटनी, बिजौरी, भाजी जैसी चीजों के साथ इन्हें खाया जाता है. बोरे जब कुछ घंटा पुराना हो जाता है तो वही बासी कहलाता है.गर्मी के मौसम में लू से बचाने का काम करता है बोरे बासीआपको बता दें कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में बोरे-बासी रचा-बसा है. यह लोगों के खान-पान में इस कदर शामिल है कि यहां के लोकगायन ददरिया और नाटकों में भी बोरे बासी का विवरण मिलता है.

ग्रामीणों का मानना है कि बोरे बासी जहां गर्मी के मौसम में ठंडक प्रदान करता है, वहीं पेट विकार को दूर करने के साथ ही पाचन के लिए यह गुणकारी भोजन है.बोरे बासी को पौष्टिक आहार माना जाता है. गर्मी के मौसम में जब तापमान अधिक होता है तब बोरे बासी विशेष तौर पर खाई जाती है. यह लू से बचाने का काम करती है. बोरे-बासी में प्रचुर मात्रा में पानी होता है. उल्टी, दस्त जैसी बीमारियों में यह शरीर में पानी की कमी को दूर करती है.रात के बचे चावल से बनाया जाता है बोरे बासी चाहे अमीर हो या गरीब सभी के घरों में बोरे-बासी को बड़े चाव से खाया जाता है ।

मेहमानों को भी इसे परोसा जाता है. आमतौर पर घरों में पके हुए बचे चावल के सदुपयोग के लिए बोरे बासी तैयार की जाती है. इसके गुणकारी महत्व को देखते हुए इसे खाने का प्रचलन है. ग्रामीण क्षेत्रों में यदि घर में कोई मेहमान या कोई व्यक्ति आ जाये तो वह भूखा न जाए.सुबह जब लोग काम पर जाएं तो उसके लिए तात्कालिक तौर पर भोजन की व्यवस्था हो जाए इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में परिवार के निश्चित सदस्यों से अधिक खाना बनाने का रिवाज प्रचलित है।

अपनी संस्कृति और अपने खानपान के लिए छत्तीसगढ़ भारत में अपनी एक खास पहचान रखता है. तीज-त्योहारों और कला परंपराओं के साथ-साथ छत्तीसगढ़ का खान-पान भी लोगों को खूब लुभाता है. छत्तीसगढ़ के प्रमुख व्यंजनों में जिनका नाम लिया जाता है उनमें ठेठरी, चीला, फरा, खुर्मी के साथ बोरे-बासी का नाम भी शामिल है.

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