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6th April 2025

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सूरजपुर ब्रेकिंग: हाथी ने अधेड़ को कुचला, मौके पर मौत! वन विभाग की लापरवाही पर ग्रामीण फूटा गुस्सा!

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AMIR PATHAN

सूरजपुर/प्रतापपुर। छत्तीसगढ़ के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के दरहोरा गांव में हाथी के हमले से एक अधेड़ व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक 15 वर्षीय बच्ची घायल हो गई। यह घटना बीती रात करीब 11 बजे की है, जब गांव के बाहर बैठे एक व्यक्ति पर अचानक हाथी ने हमला कर दिया। इस हादसे से पूरे गांव में दहशत का माहौल है।

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। घायल बच्ची को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्रतापपुर में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।!

रातभर दहशत में कांपता रहा गांव!

गांववालों के मुताबिक, रात करीब 11 बजे जंगल से निकलकर एक हाथी अचानक गांव में घुस आया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, हाथी ने घर के बाहर बैठे अधेड़ पर हमला कर दिया। लोग चिल्लाए, भगाने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए हाथी ने किसी की नहीं सुनी। देखते ही देखते अधेड़ को पैरों तले कुचल दिया और मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

गांव में अफरा-तफरी मच गई, लोग घरों में दुबक गए, लेकिन डर इतना था कि पूरी रात किसी ने आंख तक नहीं झपकाई। कुछ लोग घर छोड़कर भाग गए, तो कुछ डंडे और मशाल लेकर हाथी के वापस आने के डर में पहरा देते रहे?

रेंजर साहब, अब तो जागिए! या किसी और लाश का इंतजार है?

अब बड़ा सवाल—प्रतापपुर के रेंजर और वन विभाग के अफसर आखिर कर क्या रहे हैं? क्या उनका काम सिर्फ रिपोर्ट बनाना और मुआवजा बांटना रह गया है? क्यों हर बार किसी की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागता है?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार – ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों का मूवमेंट पिछले कुछ दिनों से देखा जा रहा था, लेकिन वन विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया। न कोई मुनादी करवाई, न ही गांव में कोई चेतावनी दी गई। अगर समय रहते ग्रामीणों को सतर्क किया जाता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टल सकता था?

कब तक यूं ही मरते रहेंगे लोग?

यह पहली बार नहीं हुआ है। पिछले कुछ महीनों में प्रतापपुर वन क्षेत्र में कई लोग हाथियों के हमले का शिकार हो चुके हैं। लेकिन वन विभाग की कार्रवाई हर बार एक जैसी रहती है?—“जांच होगी, सतर्क रहें, मुआवजा मिलेगा?

क्या वन विभाग का काम सिर्फ फाइलों में रिपोर्ट तैयार करना रह गया है?
क्या प्रशासन हाथियों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाएगा या फिर बयानबाजी ही चलती रहेगी?
क्या ग्रामीणों को ऐसे ही अपनी जान हथेली पर रखकर जीना पड़ेगा?
या फिर सरकार सिर्फ मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगी?

अब देखना ये है कि वन विभाग और प्रशासन इस बार वाकई कोई ठोस एक्शन लेगा, या फिर सबकुछ “राम भरोसे” ही चलता रहेगा?

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